गिटार और ग़ज़ल में ज्यादा फर्क नहीं, आखरी फैसला तुम्हारा है। तुम एक मुकम्मल ग़ज़ल बनना चाहती हो या चंद रोज गिटार की धुन। (chackout my writing ....) (https://yq.app.link/FcKsBIB4LQ) .....Durga bangari
Popular posts from this blog
Senti....
15 साल तक सच के लिए लगातार लड़ाई,उन लोगों से जिन्होंने ये सब कुकर्म किया।उस लोकतंत्र से, उस कानून से जो आज दोषियों को सजा देने के काम कम बल्कि पैसे और रसूखदार लोगों के कहे अनुसार खरीदा बेचा जाता है और उनके मनमुताबिक काम आता है। पर राम रहीम बलात्कार के पूरे वाक्या में एक बात जो पूरे मन व दिमाग को लगातार कचोड़ती रही है कि कहाँ गए वो बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ वाले, पक्ष विपक्ष, नेता, अभिनेता, कारोबारी जो इस देश में महिलाओं के सम्मान उनके हक और उनके अधिकारों की बातें करते है। क्या ये सब पगलाये लोग वही है जो दामिनी और दामनी जैसी पीड़ितों के लिए अनसन, कैंडल मार्च,धरना सब करती है।जो तब फाँसी की माँग करते है और अभी उसी बलात्कारी वहसी को बचाने के लिए ये सब। वैसे तो अक्षय कुमार,अनुपम खैर, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी, उमा भारती, नरेंद्र दामोदर मोदी, सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी,प्रियंका वाड्रा, मेनका गाँधी,अरुन जेटली............ ये जितने भी लोग है हमेशा महिलाओं के सम्मान और अधिकारो की बात करते है।आज कहाँ गया इनका सम्मान का ढोकरा और कहाँ गया इनका जमीर?अभी तक तो किसी भी पार्टी के नेता या अभिनेता ने एक भ...

Comments
Post a Comment