मुझे ये तक नहीं पता की मेरे इन अल्फाज़ों को देखने वाले जनाब है या मोहतरमा .....ये मेरे लिए दिल के भावनाओं को शब्दों में पिरोने का एक जरिया है। अब आप अगर कुछ कहेंगे नहीं तो हम कैसे जान पाएंगे की क्या गलत क्या सही, और ये भी कैसे पता चल पाएगा की आपको क्या पसंद क्या नहीं ...... ......तो कहिये कुछ तो कहिये
गिटार और ग़ज़ल में ज्यादा फर्क नहीं, आखरी फैसला तुम्हारा है। तुम एक मुकम्मल ग़ज़ल बनना चाहती हो या चंद रोज गिटार की धुन। (chackout my writing ....) (https://yq.app.link/FcKsBIB4LQ) .....Durga bangari
मुझे ये तक नहीं पता की मेरे इन अल्फाज़ों को देखने वाले जनाब है या मोहतरमा .....ये मेरे लिए दिल के भावनाओं को शब्दों में पिरोने का एक जरिया है।
ReplyDeleteअब आप अगर कुछ कहेंगे नहीं तो हम कैसे जान पाएंगे की क्या गलत क्या सही, और ये भी कैसे पता चल पाएगा की आपको क्या पसंद क्या नहीं ......
......तो कहिये कुछ तो कहिये