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हर स्त्री, पुरुष के साथ बराबरी चाहती है, मगर इस शर्त के साथ कि चूहे, छिपकली और कॉकरोच के साथ पुरुष अकेले ही निपटेगा.
तुझको देखा तो फिर आसमाँ ना देखा गया चाँद कहता रह गया मैं चाँद हूँ मैं चाँद हूँ।

खोज....

अंधों की बस्ती में आईने की दुकान ढूंढ रहा हूं। मैं इंसानों में आजकल इंसान ढूंढ रहा हूं। अमन शांति भाईचारा यह सब सुना तो बहुत है। कहीं देख भी पाउ बस ऐसा एक जहान ढूंढ रहा हूं। पागल हूं जो सोचता हूं, कि पीतल भी सोना हो जाएगा। बेईमानों की बस्ती में इमान ढूंढ रहा हूं। जहर बहुत घोला है शब्दों ने हवाओं में। बस जुबा मीठी कर दे ऐसे पकवान ढूंढ रहा हूं। दिल्लगी ना सही बस दिल को ही लग जाए। उस हसीन चेहरे की एक मुस्कान ढूंढ रहा हूं। आजाद तो है फिर भी गुलामी सी लगती है। वह सोने की चिड़िया वाला हिंदुस्तान ढूंढ रहा हूं।

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...गहरे कोहरे सा इश्क़ है मेरा ! तुझ से आगे कुछ दिखता ही नहीं...!!

हसीन यादें

मेरी शायरी में जब भी कोई,उसका अल्फाज आता है। कलम तो कलम,किताब का पन्ना पन्ना तक इतराता है।।

फिदरत

हर गलती पर "पर्दा" सिर्फ,"रब" ही डाल सकता हैं। "इंसान" की जात तो सिर्फ "उछालना" जानती हैं।।

Senti....

मैंने चुना था साझा सवेरा, हम दोनों के लिए.. मैंने नहीं चुनी कभी ये तन्हा रातें; जो मेरी हैं, सिर्फ़ मेरी !