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दर्द

मेरी तलाश ख़त्म हुई, वो औरो को मिल गया, मुझे एक और नाकामी एक और दर्द मिल गया !!

बदनाम

मुझे तुम बदनाम ही रहने दो , जो छलक गया वो जाम ही रहने दो आती थी वो सबसे छुप कर मिलने जहाँ मेरी उस छत को अब सूनसान ही रहने दो । जरूरी नही की मुक़म्मल हो मुहब्बत सबकी , डायरी के पन्नो में छुपी उसे दास्ताँ ही रहने दो । हो चुकी है वो किसी और के घर आबरू अब जवानी के उन किस्सों को अब राज़ ही रहने दो । तुम बदल गए शायद यही ख्वाहिश थी तुम्हारी नए बस्ते में मुझे वो पुरानी किताब ही रहने दो । मुझे तुम गुमनाम ही रहने दो .....
ख़्वाबनामा-- तुमसे मिलना अब हकीकत नहीं  एक ख्वाब लगता हैं  ख्वाबों में अक्सर डेरा डाले रहना  तुम्हारी आदत में सुमार हो चला है  लोगों की सुनिसुनायी बातें को मान कर अक्सर चार बजे सोना भी सीखा  न ख़्वाब तुमसा आया  न तुम ख़्वाब में आई  कैसे मान लूँ  किस्मत एक ख़्वाब पे टिकी है D.s.bangari

अनबुझा ख़्याल

रिश्ते ऐसे हो गए हैं, इस दौर में। जो आवाज़ तुम न दो, तो बोलते वो भी नहीं।।

दो अलग ख़्याल

पहला सब मुझे ही कहते है की भूल जाओ उसे कोई उसे क्यूँ नहीं कहता की वो मेरी हो जाए.. दूसरा तुमसे रिश्ते मेरे सभी....शब्दों के हैं....!! तुमने सुना नही कभी...मैंने कहा नही कभी!!!

दूरी

बढ़ती गयी उनकी मनमर्जियाँ , फिर इक दिन ये हुआ की हम फिर से अजनबी बन गए"

इतवार-नामा

हफ़्ते भर में बिखर चुके जिस्म को, एक इतवार ही आता है समेटने को....!